उपचारार्थ मंत्र चिकित्सा

उपचारार्थ मंत्र चिकित्सा
बवासीर दूर करने का मंत्र

ओउम् काका कर्ता किरोरी करता ओउम् करता से हो ययरसना दश हूंस प्रगटे खूनी बादी बवासीर न होय मंत्र जान के न बतावे द्वादस ब्रह्म हत्या का पाप होय लाख जप करे तो उसके बस में न होय शबद सांचा पिण्ड काचा हनुमान का मन्त्र साँचा फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा।

यह मन्त्र ग्रहण काल में जितना जप हो जाय उतना ही जप करने से सिद्ध हो जाता है। सिद्ध हो जाने पर यह मंत्र 21 बार पढ़कर पानी को मन्त्र से अभिमन्त्रित करके आबदस्त लेने से बवासीर दूर होती है।

दाढ़ में दर्द हो या कीड़ा पड़ गया हो तो निम्न मंत्र से झाड़ने से दर्द कष्ट, पीड़ा दूर हो जाती है-

ओउम् नमो आदेश गुरु को-वन में जाई अंजनी जिन जाया हनुमन्त। कीड़ा मकड़ा मसकड़ा यह तीनों भस्मन्त। गुरु कि शक्ति मेरी भक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा।

यह मन्त्र भी ग्रहण के समय जितना जपा जा सके उतना ही जप करने से सिद्ध होता है। और इसको भी सिद्ध हाने पर 21 बार पढ़कर नीम की डाली से झाड़ने से दाढ़़ का दर्द, पीड़ा आदि दूर होती है।

कखवाईः-काँख

बगल में होने वाले फोड़े को कखबाई कहते हैं। इसको दूर करने का मंत्र निम्न प्रकार से हैंः-

ओउम् नमो कखवाई भरी तलाई जहाँ बैठा हनुमन्त आई पके न फूटे चले न पीड़ा रक्षा करै हनुमन्त
वीर दुहाई गोरखनाथ की शब्द साँच पिण्ड कांचा। फुरो मन्त्र ईश्वर वाचा सत्यनाम आदेश गुरु को।

मन्त्र को सिद्ध करने के लिए ग्रहण के समय में या पर्वकालों में 100 माला जपकर सिद्ध करने के बाद 21 बार झाड़ने से और मोर पंख या नीम की डाली से जिस स्थान पर झाड़ा दे उस स्थान कि मिट्टी बाँधने से तीन दिन में कखवाई की गांठ बैठ जाती है।

कण्ठबेल दूर करने का मन्त्रः-

ओउम् नमो कण्ठबेल तू द्रुमद्रु मली सिर पर जकड़ी बज्र की ताली गोरखनाथ जागता आया बढ़ती बेल को तुरन्त घटाया। जो कुछ बची ताहि मुरझाया। घट गई बेल बढ़त नहीं बैठी तहाँ उठत नहीं। पके फूटे पीड़ा करे तो गुरु गोरखनाथ की दुहाई। ओउम् नमो आदेश गुरु को मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरी मन्त्र ईश्वरी वाचा।

ग्रहण काल अथवा पर्वकाल में 100 माला जपकर इस मन्त्र को सिद्ध करने के बाद कण्ठबेल के रोगी को सात दिन तक झाड़कर जमीन पर चाकू से 21 लकीरें खीचें तो रोग दूर हो। कण्ठबेल गले पर गरदन का एक दुसाध्य चर्मरोग होता है। झाड़ने से दूर हो जाता है।

बिच्छू का विष झाड़ने का मन्त्र

बिच्छू काटने के बाद उसका जहर जहाँ तक चढ़ा हो वहाँ से पकड़कर झाड़ें। जैसे-जैसे जहर उतरता जाए वहीं पर पकड़ता रहे और झाड़ते हुए उतारता जाए। डंक की जगह तक आने पर झाड़ना बंद कर दें और डंक से ऊपर ‘‘जहर मोहरा’’ पानी में घिसकर लगाएं। जहर मोहरा बाजार में मिल जाता है।
शिलाजीत बेचने वालों के पास भी मिल जाता है। मन्त्र को पहले बताए गये तरीके से सिद्ध किया जाना चाहिए ग्रहण के समय या पर्वकाल में 100 माला जप करके सिद्ध कर लेना चाहिए।
पहला मन्त्रः

ओउम् नमो आदेश गुरु को। लो बिच्छू कांकर वालों उतर बिच्छू न कर टालो उतरो तो उतारुं चढ़े तो मारुं गरुड़ मोर पंख हकालूं। शब्द सांचा पिण्ड काचा फुरो मंत्र ईश्वरी वाचा।

दूसरा मंत्रः-(काला बिच्छू उतारने का)

ओउम् काला बिच्छू कांकरवालो हरी पूंछ भैराला। सोना का नाडू रुपे का पतनाला आठ गाँठ नौ कोर नीचे बिच्छू ऊपर मोर कौन मोरा कौन मोरा रेतो भकभकाकर बिच्छू रहे तो वह वीर नीड निकोर के कौन वैद मानुष पर गया खाते जाते लागी वार। उतर रे बिच्छु ताहे भैरो बाबा की आन।

पागल कुतो का विष झाड़ने का मंत्र

ओउम् कामरुप देश कामाक्षी देवी जहां बसे मछन्दर जोगी। मछन्दर जोगी का झामरा कुतो सोने की डाढ रुपे का कुंडा। बन्दर नाचे रीछ बजाये चीता बैठा औषध बांटे कूकर का विष भागे। शब्द सांचा पिण्ड काचा फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा
100 माला जपकर मन्त्र को सिद्ध कर लें। फिर समय पड़ने पर काटे हुए स्थान को झाड़े।
जमीन पर चाकू की नोक से 21 लकीरें खीचें। इस प्रकार सात दिन तक झाड़ने से पागल कुतो का विष दूर हो जाता है। आजकल पागल कुतो के काटे के लिये शर्तिया इलाज इंजेक्शन हैं और इन्हें अवश्य लगवाना चाहिए। पागल कुत्ते की पहचान है कि अगर कुत्ता पागल होगा तो काटने के बाद 2-3 दिन में ही मर जायेगा रिस्क नहीं लेना चाहिये इंजेक्शन द्वारा इलाज पूरा कराना चाहिये। मन्त्र में शक्ति जरुर होती यदि ऐसा कोई मन्त्रवेत्ता हो जिसने मन्त्र सिद्ध किया हो और इस प्रकार के प्रयोग सफलता पूर्वक कर चुका हो तभी उस पर निर्भर करें।

पीलिया झाड़ने का मंत्र

पीलिया रोग में शरीर पीला पड़ जाता है, आंखें पीली हो जाती हैं, सारा कुछ पीला ही दिखाई देता है। यह पिताशय में पित्त की अधिकता हो जाने पर होता है। आजकल तो चिकित्सा विज्ञान में इस रोग के लिए बहुत औशधियां उपलब्ध हैं। परन्तु पहले जमाने में गांवों में इन रोगों की चिकित्सा मन्त्रों के ही द्वारा होती थी।
100 माला जप कर इस मन्त्र को सिद्ध करके रोगी के सिर पर कांसे की कटोरी में तिल का तेल भर कर रखें और डाभ यानी कुशा से उस तेल को चलाते हुए निम्न मंत्र को सात बार पढ़े। तीन दिन तक ऐसा करते रहने पर तेल पीला पड़ जायेगा और पीलिया रोग दूर हो जायेगा।

ओउम् नमो वीर बैताल असराल नार कहे तू देव खादी तू बादी पीलिया कूं भिदाती कारै झारै पीलिया रहे न एक निशान जो कहीं रह जाए तो हनुमन्त वीर की आन। मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा।