अश्वगंधा 

Dr.R.B.Dhawan

अश्वगंधा प्राश (निर्माण विधि) :-

अश्वगंधा का चूर्ण 500 ग्राम, सोंठ का चूर्ण 250 ग्राम, बड़ी पीपल का चूर्ण 125 ग्राम, काली मिर्च का चूर्ण 50 ग्राम। दालचीनी, इलायची, तेजपत्र, और लौंग सभी प्रत्येक पचास-पचास ग्राम बारीक़ पीस लेवें, तदन्तर सबको 6 किलो भैंस के दूध में उबालकर उसमे 3 किलो 500 ग्राम चीनी, और 1 किलो 500 ग्राम शुद्ध घी लेकर उन्हें मिलाकर मिट्टी के बर्तन में मन्दाग्नि पर पकावें। जब उबाल आ जाये तो अश्वगंधा आदि के उपरोक्त समस्त चूर्ण को थोड़े दूध के साथ पकाकर इसमें डाल दें, और उसके बाद अग्नि पर इतना पकावें कि वह करछी से लगने लगें । तदनन्तर उसमें दालचीनी, तेजपत्र, नागकेशर, और इलायची का 20 ग्राम चूर्ण डालकर पकावें । जब उसमें चावल के समान दाने पड़ने लगें और घी अलग होने लगे तब उतारकर पिपलामूल, जीरा, गिलोय, लौंग, तगर, जायफल, खश, सुगंधवाला, सफेद चंदन, बेलगिरी, कमल, धनिया, धाय के फूल, वंशलोचन, आमला, खेर, कर्पूर, पुनर्नवा, वन तुलसी, चिता, और शतावर, प्रत्येक द्रव्य को पांच पांच ग्राम लेकर महीन चूर्ण बनाकर मिलावें और एक बर्तन में फेला देवें। शीतल होने पर प्रमाण अनुसार टुकड़े कर लें। 
शास्त्रोक्त गुण धर्म :-

इसके सेवन से कफ, श्वास, अजीर्ण, वातरक्त, प्लीहा, मेदरोग, दुर्जय आमवात, शोथ, शूल, पाण्डु रोग, और अन्य वात कफ विकार नष्ट होते है। इसका एक मास तक प्रयोग करने से वृद्ध भी जवान बन सकता है। मन्दाग्नि के लिए यह बहुत ही हितकर है।  यह प्राश शक्ति उत्तपन्न करने वाला तथा बालकों के शरीरों को बढ़ाने वाला है। यह सर्व व्याधि नाशक पाक है।

Shukracharya

गिलोय (अमृता)

गिलोय का महत्व :-

गिलोय परिचय – यह एक बहु वर्षीय लता है । इसके पत्तों का आकार पान के पत्तो जैसा होता है, आयुर्वेद में इसे गुडूची, और अमृता के नाम से जाना जाता है ।

उपयोग :- आप ने देखा होगा, हमारे देश में निरंतर पिछले कुछ वर्षों से वर्षा के बाद डेंगू , और स्वाइन फ्लू का प्रकोप हो रहा है, हस्पताल डेंगू के रोगियों से भर जाते हैं, और एलोपेथी दवा इतनी कारगर साबित नही हो रही, तब लोग आयुर्वेद की शरण मे आ रहे हैं ।

संकट के ऐसे समय में आयुर्वेद के चिकित्सकों ने इसी गिलोय से लोगो को राहत दिलाई है, इसी लिए पिछले कुछ वर्षों से लोग गिलोय के गुणों से परिचित होकर गिलोय की ओर आकर्षित हुए हैं।

गिलोय के पत्तो एवं तनों से सत्व निकाल कर इस्तेमाल किया जाता है ।

यह स्वाद में कड़वा होता है ।

गिलोय के गुण इतने हैं कि गिनाए नही जा सकते ।

इसमें सबसे बड़ा गुण यह है कि यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक सिस्टम को बढ़ाता है । शोथ (सूजन) को  ठीक कर देता है।

मधुमेह को नियंत्रण में रखता है ।

शरीर का शोधन ( सफाई करना शोधन कहलाता है ) करता है ।

दमा एवं खांसी जैसे रोगों  में भी अच्छा लाभदायक है ।

इसे नीम एवं आंवला के रस के साथ इस्तेमाल करने पर त्वचा गत रोगों को ठीक करता है ।

नीम एवं आंवला के साथ सेवन करने पर एक्जिमा और सोरायसिस जैसे रोगों से मुक्ति मिल सकती है ।

यह एनीमिया की स्थिति में बहुत लाभदायक है । पाण्डु रोग (पीलिया ) में बहुत कारगर साबित होता है ।

 Dr.R.R.Dhawan