गिलोय (अमृता)

गिलोय का महत्व :-

गिलोय परिचय – यह एक बहु वर्षीय लता है । इसके पत्तों का आकार पान के पत्तो जैसा होता है, आयुर्वेद में इसे गुडूची, और अमृता के नाम से जाना जाता है ।

उपयोग :- आप ने देखा होगा, हमारे देश में निरंतर पिछले कुछ वर्षों से वर्षा के बाद डेंगू , और स्वाइन फ्लू का प्रकोप हो रहा है, हस्पताल डेंगू के रोगियों से भर जाते हैं, और एलोपेथी दवा इतनी कारगर साबित नही हो रही, तब लोग आयुर्वेद की शरण मे आ रहे हैं ।

संकट के ऐसे समय में आयुर्वेद के चिकित्सकों ने इसी गिलोय से लोगो को राहत दिलाई है, इसी लिए पिछले कुछ वर्षों से लोग गिलोय के गुणों से परिचित होकर गिलोय की ओर आकर्षित हुए हैं।

गिलोय के पत्तो एवं तनों से सत्व निकाल कर इस्तेमाल किया जाता है ।

यह स्वाद में कड़वा होता है ।

गिलोय के गुण इतने हैं कि गिनाए नही जा सकते ।

इसमें सबसे बड़ा गुण यह है कि यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक सिस्टम को बढ़ाता है । शोथ (सूजन) को  ठीक कर देता है।

मधुमेह को नियंत्रण में रखता है ।

शरीर का शोधन ( सफाई करना शोधन कहलाता है ) करता है ।

दमा एवं खांसी जैसे रोगों  में भी अच्छा लाभदायक है ।

इसे नीम एवं आंवला के रस के साथ इस्तेमाल करने पर त्वचा गत रोगों को ठीक करता है ।

नीम एवं आंवला के साथ सेवन करने पर एक्जिमा और सोरायसिस जैसे रोगों से मुक्ति मिल सकती है ।

यह एनीमिया की स्थिति में बहुत लाभदायक है । पाण्डु रोग (पीलिया ) में बहुत कारगर साबित होता है ।

 Dr.R.R.Dhawan